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Research Communications, Volume: 3, Issue: 2, July-December 2025, pp 120-125

Research Communications, Volume: 3, Issue: 2, July-December 2025, pp 120-125

 पंडित दीन दयाल उपाध्याय के चिंतन के मूल तत्व

Author(s): अरुण कुमार वर्मा

Abstract: भारतीय राजनीतिक चिन्तन की परम्परा में कई मनीषी विचारक और दार्शनिक हुएहैं जिन्होंने भारतीय समाज और राजनीति के पुनर्निर्माण के लिए ऐसे विभिन्न विचारों का प्रतिपादन किया, जिनके आधार पर भारतीय राजनीति और समाज को एक नई दिशा दी जा सकती हैऔर जो विशुद्ध रुप से भारतीयता के समग्र विचार पर आधारित हो। पं0 दीन दयाल उपाध्याय एक ऐसे ही विचारक थे जिन्होने भारतीय राजनीति के आदर्श स्वरुप की स्थापना के लिए एक वैचारिक आधारशिला रखी, जिसे एकात्म मानववाद कहा जाता है। एकात्म मानववाद का विचार उनके समस्त सामाजिक और राजनीतिक चिन्तन का आधार है, उनका एकात्म मानववाद का विचार अत्यंत व्यापक विचार है जिसमें सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का सार निहित है। पं0 दीन दयाल उपाध्याय ने भारतीय राजनीति और समाज के पुनर्निमाण के एकात्म मानववाद का विचार दिया जिसमें कई तत्व शामिल हैं जो एक आदर्श समाज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होने भारतीय राजनीति में सक्रिय रुप से भाग लिया और भारतीय राजनीति में व्याप्त समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न विचारों का प्रतिपादन किया जो आज के वर्तमान समाज में बहुत ही प्रासंगिक है क्योंकि वे सभी सर्वसमावेशी समाज और राजनीति के विचार पर आधारित हैं। वे कहते थे कि मानववाद ही इस संसार का मूल तत्व है क्योंकि विश्व की सभी व्यवस्थाएं मानवीय कल्याण के लिए ही हैं और मानव हितों की रक्षा ही उनका अन्तिम ध्येय है, इसलिए मानवता के कल्याण के लिए सभी सस्थाओं में समन्वय एवं समग्रता होनी चाहिए, जिसमें स्थानीय, राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्पूर्ण व्यवस्था से मनुष्य का सामंजस्य और समन्वय हो और जिसके मूल में मानव हो।

Keywords: पं0 दीन दयाल उपाध्याय, एकात्म मानववाद, समाजवाद, पूंजीवाद, अंत्योदय, स्वदेशी, मानवतावाद, लोकतंत्र।

DOI: doi.org/10.65719/RC.3.2.2025.120

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